बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य
पाठ्यक्रम: जीएस-1/ स्थान; जीएस-2/ अंतर्राष्ट्रीय संबंध
चर्चा में क्यों?
- ईरान द्वारा हूती विद्रोहियों से यह आग्रह किए जाने की रिपोर्टों के बाद कि यदि संयुक्त राज्य अमेरिका (US) ईरान पर आक्रमण करता है, तो वे इस रणनीतिक जलमार्ग को बंद कर दें, बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य एक बार फिर सुरक्षा संबंधी चिंताओं के केंद्र में आ गया है।
बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य
- यह एक संकीर्ण जलमार्ग है, जो लाल सागर (Red Sea) को अदन की खाड़ी (Gulf of Aden) से जोड़ता है।
- उत्तर में यह स्वेज़ नहर तथा भूमध्य सागर से जुड़ता है, जबकि पूर्व में इसका संपर्क अरब सागर एवं हिन्द महासागर से होता है।

महत्व
- बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य विश्व के सबसे महत्त्वपूर्ण समुद्री व्यापार एवं ऊर्जा परिवहन मार्गों में से एक है। सामान्यतः वैश्विक व्यापार का लगभग 12% इसी मार्ग से होकर गुजरता है।
- 2024 में ही इस जलडमरूमध्य से लगभग 4.1 अरब बैरल कच्चे तेल एवं पेट्रोलियम उत्पादों का परिवहन हुआ, जो वैश्विक कुल का लगभग 5% था।
- यदि यह मार्ग बंद हो जाता है, तो जहाजों को केप ऑफ गुड होप के रास्ते होकर जाना पड़ेगा, जिससे यात्रा में 4,000–6,000 समुद्री मील तथा 10–20 दिन अतिरिक्त लगेंगे। इससे समुद्री परिवहन लागत बढ़ेगी और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाएं प्रभावित होंगी।
भारत के लिए प्रासंगिकता
- इस मार्ग में किसी भी प्रकार का व्यवधान भारतीय अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है, क्योंकि भारत के लगभग एक-तिहाई व्यापार का परिवहन इसी मार्ग से होता है।
- बढ़ती भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के बीच भारत को फ्रांस, जापान, मिस्र तथा सऊदी अरब के साथ मिलकर नियम-आधारित नौसैनिक कार्यबल के गठन में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, ताकि वाणिज्यिक समुद्री परिवहन की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके, नौवहन की स्वतंत्रता बनाए रखी जा सके तथा SAGAR (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) की परिकल्पना के अनुरूप अपने समुद्री एवं आर्थिक हितों की रक्षा की जा सके।
स्रोत: TH
भीड़ नियंत्रण के दौरान पुलिस की पहचान
पाठ्यक्रम: जीएस-2/ शासन
सन्दर्भ
- हाल ही में दिल्ली में हुए एक विरोध-प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस तथा रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के कुछ कर्मियों की सादे कपड़ों में अथवा बिना दिखाई देने वाले नेमप्लेट के तैनाती ने पुलिस की पहचान और उत्तरदायित्व को लेकर बहस छेड़ दी है।
भारतीय कानून क्या कहता है?
- यद्यपि कुछ विशेष परिस्थितियों, जैसे खुफिया जानकारी एकत्र करने से संबंधित अभियानों में पहचान छिपाना या आवश्यक होने पर भेष बदलना उचित हो सकता है, किंतु सामान्य पुलिस व्यवस्था वैधानिक प्रावधानों तथा न्यायिक दिशानिर्देशों द्वारा संचालित होती है।
- भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 148 से 160 के अनुसार, केवल मजिस्ट्रेट अथवा पुलिस अधिकारी ही किसी अवैध जमाव (Unlawful Assembly) को तितर-बितर करने का आदेश दे सकता है। यद्यपि कानून में अधिकारियों के लिए अपनी पहचान प्रदर्शित करना स्पष्ट रूप से अनिवार्य नहीं किया गया है, फिर भी विधि विशेषज्ञों का मत है कि ऐसे आदेशों की वैधानिक वैधता के लिए पुलिस अधिकारी की पहचान स्पष्ट होना आवश्यक है।
- डी.के. बसु बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (1997) मामले में उच्चतम न्यायालय ने निर्णय दिया कि गिरफ्तारी करने वाले पुलिस अधिकारियों की स्पष्ट एवं दृष्टिगोचर पहचान होनी चाहिए। यह निर्णय पुलिस के उत्तरदायित्व के सिद्धांत को सुदृढ़ करता है।
- 2025 में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने प्रश्न उठाया कि जब सादे कपड़ों में तैनात कर्मी अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हों, तो नागरिक उन्हें पुलिस अधिकारी के रूप में कैसे पहचानेंगे।
- अतः, यद्यपि असाधारण परिस्थितियों में सादे कपड़ों का उपयोग उचित हो सकता है, किंतु सामान्य कानून-व्यवस्था संबंधी दायित्वों के दौरान उनका उपयोग अब भी विधिक अस्पष्टता (Grey Area) का विषय बना हुआ है।
स्रोत: IE
भारत ने अपना पहला एयर टैक्सी प्रोटोटाइप प्रस्तुत किया
पाठ्यक्रम: जीएस-3/ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी
सन्दर्भ
- आईआईटी मद्रास द्वारा प्रोत्साहित नवप्रारंभिक उद्यम द ईप्लेन कंपनी ने e200X विमान मॉडल के भारत के पहले पूर्ण आकार के विद्युत चालित ऊर्ध्वाधर उड़ान एवं अवतरण (eVTOL) प्रोटोटाइप (PT-01) का अनावरण किया है।
- इसकी वाणिज्यिक सेवाएँ वर्ष 2028 तक प्रारंभ होने की योजना है। प्रारंभ में इसका उपयोग एयर एम्बुलेंस सेवाओं के लिए किया जाएगा और बाद में इसे यात्री परिवहन तक विस्तारित किया जाएगा।
eVTOL क्या है?
- eVTOL (Electric Vertical Take-Off and Landing) एक बैटरी चालित विमान है, जो हेलीकॉप्टर की तरह ऊर्ध्वाधर रूप से उड़ान भरने और उतरने में सक्षम होता है तथा इसके बाद सामान्य हवाई जहाज की तरह आगे की दिशा में उड़ान भरता है।
- eVTOL को लंबे रनवे की आवश्यकता नहीं होती। इसके अधिकांश डिज़ाइनों में एक बड़े रोटर के स्थान पर अनेक विद्युत चालित प्रोपेलर लगे होते हैं, जिससे यह अपेक्षाकृत छोटे स्थानों से भी उड़ान भर सकता है।
eVTOL हेलीकॉप्टर से कैसे भिन्न है?
- यद्यपि हेलीकॉप्टर और eVTOL दोनों ऊर्ध्वाधर रूप से उड़ान भरने और उतरने में सक्षम हैं, किंतु उनकी संरचना एवं कार्यप्रणाली भिन्न होती है।
- हेलीकॉप्टर विमानन ईंधन से संचालित एक या दो बड़े रोटरों पर निर्भर होते हैं, जबकि eVTOL बैटरियों से संचालित अनेक विद्युत मोटरों एवं प्रोपेलरों का उपयोग करता है।
- अनेक eVTOL निर्माता वितरित विद्युत प्रणोदन (Distributed Electric Propulsion) तकनीक का उपयोग करते हैं, जिसमें कई प्रोपेलर मिलकर उत्थापन (Lift) और प्रणोदन (Thrust) उत्पन्न करते हैं।
- इस प्रकार की संरचना अतिरिक्त सुरक्षा (Redundancy) प्रदान करती है, क्योंकि यदि एक प्रोपेलर कार्य करना बंद कर दे, तो शेष मोटरें उत्थापन बनाए रखती हैं, जिससे विमान सुरक्षित रूप से नीचे उतर सकता है।
वाणिज्यिक eVTOL यात्री सेवाओं की चुनौतियाँ
- विमान प्रमाणीकरण: किसी भी वाणिज्यिक विमान को यात्रियों के परिवहन से पहले विमानन प्राधिकरणों द्वारा उड़ान योग्य (Airworthy) प्रमाणित किया जाना आवश्यक होता है। किंतु नियामक संस्थाएँ अभी eVTOL के लिए पृथक प्रमाणन प्रणाली विकसित कर रही हैं।
- विभिन्न देशों के नियामक मानकों में भिन्नता होने से लागत बढ़ सकती है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इनके विस्तार में बाधा आ सकती है।
- आधारभूत संरचना: eVTOL सेवाओं के लिए विशेष रूप से विकसित वर्टीपोर्ट की आवश्यकता होगी, जहाँ विमान के उड़ान भरने, उतरने, पुनर्भरण (चार्जिंग) तथा रखरखाव की सुविधाएँ उपलब्ध हों।
- बैटरियों की सीमाएँ: बैटरियाँ eVTOL के कुल भार का बड़ा हिस्सा होती हैं, जिससे उसकी भार वहन क्षमता (Payload) तथा उड़ान सीमा (Range) सीमित हो जाती है।
- वाहन में जितने अधिक यात्री होंगे, उतनी बड़ी बैटरी की आवश्यकता होगी। बड़ी बैटरी से वाहन का भार बढ़ता है, जिससे उसकी दक्षता कम हो जाती है।
- नियामकीय व्यवस्था: वाणिज्यिक संचालन के लिए पायलट लाइसेंस, वायु यातायात प्रबंधन, रखरखाव मानकों तथा उड़ान संचालन से संबंधित स्पष्ट नियमों की भी आवश्यकता होगी।
स्रोत: BS
पेलेट गन
पाठ्यक्रम: जीएस-3/ आंतरिक सुरक्षा
सन्दर्भ
- दिल्ली पुलिस ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन के दौरान पेलेट गन के उपयोग संबंधी रिपोर्टों का खंडन किया है।
पेलेट गन क्या हैं?
- पेलेट गन पुलिस एवं सैन्य बलों द्वारा विश्वभर में प्रयुक्त अघातक (Non-Lethal) भीड़-नियंत्रण के साधनों में से एक है। अन्य प्रमुख साधनों में आँसू गैस, जल तोप, मिर्च स्प्रे तथा टेज़र गन शामिल हैं।
- प्रत्येक कारतूस में सीसे (Lead) के बने सैकड़ों छोटे-छोटे छर्रे (Pellets) होते हैं, जो दागे जाने पर व्यापक क्षेत्र में फैल जाते हैं।
- यद्यपि इनका उद्देश्य मृत्यु की संभावना को कम करना होता है, फिर भी निकट दूरी से चलाए जाने पर अथवा छर्रे आँखों जैसे संवेदनशील अंगों पर लगने पर ये गंभीर चोट पहुँचा सकते हैं, क्योंकि छर्रे शरीर के कोमल ऊतकों में प्रवेश कर सकते हैं।
- भारत में 2010 में जम्मू एवं कश्मीर में अशांति के दौरान पहली बार पेलेट गनों को जीवित गोलियों (Live Ammunition) के अपेक्षाकृत कम घातक विकल्प के रूप में अपनाया गया था, ताकि नागरिकों की मृत्यु की घटनाओं को कम किया जा सके।
- मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOPs) के अनुसार, सुरक्षा बलों को न्यूनतम बल का प्रयोग करना चाहिए तथा यदि गोली चलाना अपरिहार्य हो, तो कमर के नीचे निशाना लगाने का निर्देश दिया गया है।
- भारतीय सुरक्षा बलों द्वारा उपयोग की जाने वाली पेलेट गनों का निर्माण आयुध निर्माणी, ईशापुर (Ordnance Factory, Ishapore) में किया जाता है।
- भीड़ नियंत्रण के अतिरिक्त, पेलेट गनों का उपयोग शिकार तथा हानिकारक जीवों (Pest) के नियंत्रण के लिए भी किया जाता है।
स्रोत: TH
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